वाट्सऐप पर सिंधी अधिकार मंच के गठन तथा भोपाल में सिंधी विद्वानों की तद्विषयक गोष्ठी का समाचार पढ़ा।यद्यपि,भोपाल गोष्ठी की कार्यवाही रिपोर्ट उपल्बध नहीं हो पाई,तथापि संयोजक,राष्टृीय सिंधी अधिकार मंच की दिनांक 3-8-2016 की रिपोर्ट में उदेश्यों तथा भविष्य की कार्यवाही का पर्याप्त आभास मिला। रिपोर्ट के गहन अध्ययन से ज्ञात हुआ कि मंच की उच्चतम प्राथमिकता भारत में सिंधी भाषी प्रांत की स्थापना ही है।परंतु,यदि यह सम्भव न हो तो भारतीय सिंधी समाज के समस्त मौलिक अधिकारों की प्रापिती और सभी संवैधानिक पदों पर आसीनता हेतु सिंधीयों को सक्षम बनाने के लिए उन्हें अल्पसंख्यक घोषित कर दिया जाय।
सिंधी भाषायी प्रांत की स्थापना पर संशय का प्रमुख कारण उनका यह भ्रम है कि 1956 के प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग द्वारा सिंध प्रांत की मांग को अस्वीकृत किया गया था| सिंधी अधिकार मंच के सम्मानित विद्वानों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि 1956 के आयोग के सम्मुख सिंधी भाषी राज्य की मांग रखी ही नहीं गई थी,क्योंकि उस समय तक सिंध से विस्थापित सिंधी अपने को आथिर्क रूप से पूर्णतया स्थापित करने में उळझे हुए थे। चंद सिंधी विचारकों के लेख 78-80 में सिंधी प्रेस में प्रकाशित होने के बाद लोगों का ध्यान इस ओर गया।अतः 1956 में आयोग के सम्मुख विचार हेतु प्रस्ताव के जाने व अस्वीकृति की ख़बर सही नहीं है।
मैं उन सभी सिंधी संस्थाओं का समर्थक हूं जो सिंधीयों को स्थानीय लोगों में विलीन होने का विरोध करते हैं तथा सिंधीयों की पहचान व अधिकारों के प्रति सजग हैं।
सिंधी अधिकार मंच के विद्वानों के निम्न विचारों का मैं समर्थन करता हू:-
1-सिंधी युवकों को आई.ए.एस.,आई.पी.एस.,आई.एफ.एस.की प्रतियोगिता के लिए तैयार करने के उद्देश्य से उन्हें सिंधी साहित्य का ज्ञान कराना।
2-शिड्यूल कास्ट सिंधीयों को आरक्षण दिलाने का समर्थन करता हूं। परंतु आरक्षण के लिए हिंदू धर्म के स्थान पर विशेष सिंधी धर्म की मान्यता का विरोध करता हूं। जिस हिंदु धर्म को बचाने के लिए अपनी मातृभूमि सिंधु को छोड़ना पड़ा,उसी हिंदु धर्म की विकृति उचित नहीं।
3-बेरोज़गार सिंधीयों को सरकारी नौकरियां और एम.बी.ए. आदि में प्रवेश दिलाने का सबसे आसान तरीका है उन्हें सिंधी शिक्षा का काम चलाऊ ज्ञान कराना।आई.ए.एस. आदि के लिए चलाए जाने वाली कक्षाओं के साथ साथ,सप्ताह में एक दिन अथवा दिन में किसी अतिरिक्त शिफ्ट में,इन बेरोज़गार सिंधीयों की सिंधी शिक्षा पर विचार किया जा सकता है| अन्य प्रांतों की भांति,सिंधी प्रदेश में भी सिंधी भाषा जानने वालों को स्वंयमेव अारक्षण मिल जायेगा।
4-भारतीय सिंधीयों को भाषाई अल्पसंख्यक की मान्यता मिली हुई है।इसके अंतर्गत सिंधी बच्चों को सिंधी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिला हुआ है। परन्तु,उनके अभिभावकों को इस अधिकार का उपयोग करने में कोई रूचि नहीं है,अन्यथा सिंधीयों को ऊपर बताई गई विधि से स्वंयमेव आरक्षण का लाभ मिल जाता।राजनैतिक अल्पसंख्यक की मांग अदूरदर्शता पूर्ण है।इसके मिल जाने से,सिंधी प्रांत की मांग पर कुठाराघात होगा
5-मेरा सुझाव है कि हमें भारत की सिंधी जनता का मत जान लेना चाहिए कि वह सिंधीप्रदेश चाहती है अथवा राजनैतिक अल्पसंख्यक का दर्जा।बहुमत,दोनों में से किस पर एकमत है । सिंधी एकता सरवोपर है।एकता के अभाव में विगत 70 साल में हमें सरकार से उपेक्षा के अलावा कुछ भी नहीं मिला।
6-अब तक सिंधी एकता में सबसे बड़ी बाधा महित्वकांक्षी लोगों की प्रतिस्पर्धता के कारण आपसी टकराव तथा गुटबंदी रहा है।इसकी वजह से वे सिंधी समाज के हितों को भूल कर मंज़िल से भटक जाते हैं।सिंधी जनता को जागरूक होकर,ऐसे तत्वों पर हाबी होना पड़ेगा और उन्हें सही रास्ते पर लाना होगा।
7-राष्टृीय स्तर की सिंधी मंज़िल को हासिल करने के साथ साथ प्रांतो की स्थानीय सिंधी समस्याओं हेतु सिंधी एकता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन करना होगा।
Jai zulelal,jiye sundar
ReplyDeleteHere all are unaware of all this .
Now at present what is going on .