Friday, January 20, 2017

आगामी चुनाव और सिंधी मतदाता


ऐतिहासिक कारणों से,विगत 70 साल के चुनावों में,सिंधी मतदाताओं का बहुमत, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी को ही वोट देता रहा है। लगभग 65 वर्षों तक सिंधी जनता की कोई अखिल भारतीय स्तर की सामूहिक मांग नहीं थी।स्थानीय समस्याओं के लिए उम्मीदवार की लोकप्रियता को देखते हुए,गुणावगुण के आधार पर सिंधी मतदाता अपने वोट का प्रयोग किया करता था।अधिकांश सिंधी मतदाता तो अपने व्यापार और दुकानदारी के नुकसान से बचने के लिए अपना वोट डालने जाते ही नहीं थे।

परंतु विगत 5 वर्षों में स्थिति बदल चुकी है। सिंधी जनता में जागरुकता आने से अखिल भारतीय स्तर की निम्न मांगें उभर कर सामने आई हैंः-

1-दूर दर्शन पर 24 घंटे 7 दिन के चैनिल सभी भाषाओं को दिए गए हैं। क्योंकि सभी भाषाओं की अपनी अपनी राज्य सरकारें चैनिल के खर्चे की प्रतिपूर्ती करते हैं।अभी हाल ही में बिना राज्यों वाली उर्दू और संस्कृत भाषाओं को भी 24-7 चैनिल एलाट किए गए हैं। खर्चे की प्रतिपूर्ती भारत सरकार कर रही है, सिंधीयों की इस न्यायोचित मांग की अवहेलना निरंतर जारी है।

2-सिंधीयों को राजनीति सहित सभी क्षेत्रों में एन.सी.एम.एक्ट के अंतर्गत आरक्षण दिया जाय,ताकि उन्हें सरकारी नौकरीयां आदि मिल पायें।

3-अन्य भाषा भाषीयों की भांति,सिंधीयों को भी सिंधी भाषी प्रांत दिया जाय।यह प्रांत पहले से ही मौजूद है,केवल प्रशासकीय मान्यता भर दी जानी है।

4-अन्य भाषा भाषीयों को मिलने वाले राजनैतिक अधिकार सिंधीयों को भी दिए जायं। सिंधी मतदाताओं से अपील है कि आगामी चुनाओं में जिस राजनैतिक पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र(मैनीफैसटो) में उपरोक्त सिंधी मांगें शामिल हों, केवल उसी पार्टी को सिंधी मतदाता वोट दें। सिंधीयों को पूर्ण विश्वास है कि हमारे लोकप्रिय प्रधान मंत्री माननीय नरेंदर मोदी जी,
भारतीय सिंधीयों की भावनाओं को ध्यान में रखकर,उपरोक्त न्यायोचित मांगों को भारतीय जनता पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में सम्मिलित कराने की व्यवस्था अवश्य करवायेंगे।

ज्ञान हेमनाणी

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