Friday, January 20, 2017

सिंधी कौम को दीपावली का संदेश


आज दीपावली है।आज ही के दिन राम 14 वर्ष के बाद अपने वतन वापस लौट आए और उनके स्वागत में जनता ने घरों को सजाया तथा दीपों की कतारों से रोशनी करी। 14 अगस्त 1947 को,सिंधी कौम के एक वर्ग को अनिशिचित काल की
जलावतनी और सिंधु माता को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई।दीपावली का दिन हमें प्रेरणा देता है कि हम अपनी सिंधु माता को रिहा करवा कर अपनी जलावतनी समाप्त करवाएंl दीपावली के दिन,बीते हुए वर्ष के लेखे जोखे का परीक्षण करके,नए बहीखाते खोलने की परम्परा है।इसको सिंधी कौम पर लागू करते हुए,आइये देखें,विगत वर्ष में,सिंधी
कौम के खोए हुए गौरव को वापस लानें में,कौनसे प्रयतन किए गए और आगामी वर्ष कौनसे कदम उठाये जायेंगे।



सिंधी कौम के पतन का मुख्य कारण था,उस पर ज़बरदस्ती दो कौम का सिध्दांत लादना।ब्रिटिश हुकूमत की शह पर साम्प्रदायक ताकतों ने कौम के दो वर्गों के बीच नफरती दूरीयां पैदा कर दी थी।
विगत वर्ष में,सोशल मीडिया के माध्यम से,संसार भर के सिंधी कौम के बाशिंदों को परस्पर नज़दीक लाने के सफल प्रयतन किए गए।इसके अतिरिक्त वर्लड सिंधी कांग्रेस,सिंधी ऐसोसिएशन आफ कैनाडा एण्ड नार्थ अमेरिका,जीम-सैद स्टडीज़ बोर्ड तथा विदेशों की अनेकों सिंधी संस्थाओं का योगदान भी सराहनीय रहा।
हिंद और सिंध के सिंधीयों की मैत्री और सिंधी एक कौम के विचार को पुनर्जीवित करने हेतु, सोशल मीडिया तथा साहित्यक,सांस्कृतिक,संत कंवररामजी से जुड़े प्रतिष्ठानों आदि द्वारा प्रभावी कार्य हुआ।साम्प्रदायक तत्वों के कमज़ोर होने से,सिंध में आज़ादी हेतु अधिक जागृति उत्पन्न हुई।सभी सिंधी,आशा भरी निगाहों से मोदी सरकार की ओर देख रहें हैं।सम्भवतः2017 में सफलता मिल जायेगी।

हिंद की सिंधी कौम को शक्तिशाली बनाने के लिए विगत वर्ष,सिंधी इण्डियन नेशनल डेमोक्रेटिक(सिंद)पार्टी की स्थापना की गई। इस वर्ष निर्णायक कदम उठायेंगे।

सिंधी कौम के 9 करोड़ भाई बहनों को दीपावली की शुभ कामनायें।

ज्ञान हेमनाणी

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